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पंजाबी समाज को ‘रिफ्यूजी’ कहना दुर्भाग्यपूर्ण : पराग गाबा

करनाल, अभी अभी। हिसार में पंजाबी बिरादरी के लिए रिफ्यूजी जैसे अपमानजनक शब्द का प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। यह केवल एक समुदाय के खिलाफ दिया गया बयान नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के संघर्ष, त्याग, बलिदान और आत्मसम्मान का अपमान है जिन्होंने देश के विभाजन की सबसे बड़ी त्रासदी को अपने जीवन में झेला था। जिला कांग्रेस कमेटी करनाल के अध्यक्ष पराग गाबा ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 1947 का विभाजन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के दिलों में आज भी जीवित एक दर्द है। आजादी से पहले भारत, पाकिस्तान और वर्तमान क्षेत्र एक साझा सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का हिस्सा थे। विभाजन ने केवल जमीन का बंटवारा नहीं किया, बल्कि लाखों परिवारों को अपने घर-आंगन, कारोबार, रिश्ते और यादें छोडऩे के लिए मजबूर कर दिया। उस समय पंजाबी समाज, विशेषकर पंजाबी खत्री समाज, अपने घर, खेत, कारोबार, संपत्ति और कई मामलों में अपने परिजनों तक को खोकर भारत आया था। उनके पास धन-दौलत नहीं थी, लेकिन हौसला, मेहनत और आत्मसम्मान की पूंजी अवश्य थी। पराग गाबा ने कहा कि जिन लोगों को कभी शरणार्थी शिविरों में रातें बितानी पड़ीं, जिन्होंने फुटपाथों और छोटी दुकानों से अपने जीवन की नई शुरुआत की, वही परिवार आज देश की आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक प्रगति के मजबूत स्तंभ बनकर खड़े हैं। उन्होंने अपने आंसुओं को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया और कठिन परिश्रम के बल पर अपनी नई पहचान स्थापित की। उन्होंने कहा कि पंजाबी समाज कभी किसी पर बोझ नहीं बना। इस समाज ने अपने खून-पसीने से व्यापार खड़े किए, उद्योग स्थापित किए, रोजगार पैदा किए और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। आज देश के हर कोने में पंजाबी समाज अपनी मेहनतकशी, उद्यमिता और राष्ट्रभक्ति के लिए सम्मान प्राप्त करता है। पूरा पंजाबी समाज और छत्तीस बिरादरियां अपने सम्मान, एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के लिए हमेशा एकजुट थीं, हैं और रहेंगी।

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