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राजा का धर्म विलास भोगना नहीं अपितु सेवा करना है : विजय कौशल महाराज

करनाल, अभी अभी। श्री हरि कथा प्रचार समिति व श्री श्याम परिवार की ओर से मंगलसेन सभागार अंबेडकर चौक में श्री राम कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कथा के विश्राम दिवस पर श्री रामायण की पूजा करने और व्यास पीठ को नमन करने के बाद विजय कौशल जी महाराज ने लंका दहन प्रसंग व राजतिलक का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीरामचंद्र जी का राज्याभिषेक होना था तो उससे पूर्व उन्होंने अपने भाइयों की सेवा की। उनको भोजन कराया और उसके बाद स्वयं की सुध ली। संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि राजा का धर्म विलास भोगना नहीं अपितु सेवा करना है। इस बात का आदर्श श्रीराम जी से बढकऱ कोई नहीं हो सकता। राज्याभिषेक प्रसंग के समय राजा भये रघुराई कौशल्या मैया दे दो बधाई..भजन पर परिसर में उपस्थित हर श्रद्धालु जहां था वहीं पर भक्तिमय हो झूमने लगा। विजय कौशल जी ने कहा कि बुराई कभी नहीं मरती। बुरी आदतें कुछ समय के लिए सो जाती हैं। अनुकुल मौसम आते ही जग जाती हैं। शुभ और अशुभ का बीज कभी मरता नहीं है। बुरे लोग भी वृदावस्था में साधु हो जाते हैं और सारा जीवन साधु की तरह जीने वाले व्यक्ति वृद्धावस्था में दुष्टता की पराकाष्ठा कर देता है।

श्री राम और श्री कृष्ण लीलाओं का वर्णन
श्रीराम कथा के विश्राम अवसर पर भगवान श्री राम और श्री कृष्ण की लीलाओं का संगीतमय चित्रण किया गया। कलाकरों ने अदभुत मंचन किया। श्री राम और श्री कृष्ण के जीवन आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। अंत में भंडारा लगाकर प्रसाद वितरण किया गया। दोनों संस्थाओं की ओर से श्री राम कथा के मंगलमय आयोजन पर सभी का आभार प्रकट किया गया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर अध्यक्ष कैलाश चंद गुप्ता, प्रधान शशि भूषण गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष घनश्याम गोयल व पंकज गोयल, उपप्रधान अमन बंसल, महासचिव सुनील गुप्ता, सचिव पुनीत मित्तल, कोषाध्यक्ष सुभाष गुप्ता, विवेक गुप्ता, प्रवीण गर्ग, डॉ एस.के. गोयल, रामकुमार गुप्ता, रमन बंसल, हरिप्रकाश, तरुण, सीए प्रवीण, बलबीर, सुरेश, आशीष, सुनील व राजेश, महिंदर चौधरी, रमेश आदि मौजूद रहे।

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