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कल मनाई जाएगी श्री गणेश चतुर्थी, पंडित नीलमणि ने बताया पूजन का समय

करनाल, अभी अभी। श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों का जीवांत स्वरूप पर्व श्री गणेश चतुर्थी बुधवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को प्रभु श्रीगणेश का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस पावन तिथि को हम गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं। पंडित नीलमणि शुक्ला ने श्री गणेश चतुर्थी का महत्व और पूजन करने की विधि व समय बारे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्री गणेश प्रथम पूज्य, बुद्धि के दाता और विघ्नों को हरने वाले देवता हैं। कोई भी धार्मिक कार्य, विवाह, यात्रा या नया कार्य बिना गणपति पूजन के शुरू नहीं किया जाता। इस दिन का भक्तों को सालभर इंतज़ार रहता है क्योंकि यह दिन उनके लिए उत्सव, भक्ति और आनंद से भरा होता है। उन्होंने कहा कि इस बार गणेश चतुर्थी के दिन रवि योग समेत कई सारे योगों का निर्माण होगा। ऐसा योग 500 सालों में एक बार देखने को मिलता है। इस बार रवि योग के साथ धन योग, लक्ष्मी नारायण योग, गजकेसरी योग, शुभ योग और आदित्य योगों का निर्माण होने जा रहा है। साथ ही हस्त नक्षत्र का योग भी है। नीलमणि शुक्ला ने बताया कि 27 अगस्त को पूजन मुहूर्त सुबह 11.05 मिनट से लेकर दोपहर 1.40 मिनट तक रहेगा। गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान श्री गणेश की प्रतिमा लें और उसको साफ करें। फिर एक कलश में जल भरकर उस पर गणेश जी को शुभ मुहूर्त में स्थापित करें। उसके बाद गणेश जी को सिंदूर, दूर्वा, घी चढ़ाएं और 21 मोदक का भोग लगाएं।

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